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अकà¥à¤¸à¤° घर के बड़े-बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— घी खाने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि à¤à¥‹à¤œà¤¨ में घी को शामिल करने से न सिरà¥à¤« आप शारीरिक रूप से मजबूत बनेंगे, बलà¥à¤•ि सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ à¤à¥€ रहेंगे। वहीं, कà¥à¤› लोगों का मानना है कि घी खाना यानी बीमारियों को दावत देना है। अब इनमें से कà¥à¤¯à¤¾ सही है और कà¥à¤¯à¤¾ गलत? संà¤à¤µà¤¤: आपके लिठचà¥à¤¨à¤¾à¤µ करना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो रहा होगा। अगर à¤à¤¸à¤¾ है, तो देसी घी से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ सà¤à¥€ सवालों के जवाब पाने के लिठइस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल को जरूर पढ़ें। सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤²à¤•à¥à¤°à¥‡à¤œ के इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में हम घी खाने के फायदे के साथ ही घी लगाने के फायदे के बारे में बात करेंगे।
घी कà¥à¤¯à¤¾ है?
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ समय से दूध और उससे बने उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जा रहा है, जैसे – दही, मकà¥à¤–न व मावा आदि। इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ में से à¤à¤• है घी, जिसे दूध से निकाले गठमकà¥à¤–न या मलाई को गरà¥à¤® करके बनाया जाता है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में इसका उपयोग तेल के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर à¤à¥€ किया जाता है। रोटी, लडà¥à¤¡à¥‚ व गà¥à¤²à¤¾à¤¬ जामà¥à¤¨ जैसे पकवानों के अलावा घी का उपयोग कई औषधीय गà¥à¤£à¥‹à¤‚ के कारण दवाओं में à¤à¥€ किया जाता है।
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में तो कà¥à¤› बीमारियों का इलाज देसी घी से ही किया जाता है। इसलिठघी ना सिरà¥à¤« खाने में फायदेमंद है बलà¥à¤•ि घी लगाने के फायदे à¤à¥€ हो सकते हैं। हालांकि, जरूरत से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सेवन करने पर घी खाने के नà¥à¤•सान à¤à¥€ हो सकते हैं।
घी के फायदे
सेहत के साथ-साथ तà¥à¤µà¤šà¤¾ और बालों के लिठà¤à¥€ घी के फायदे कई हैं। यहां हम घी के कà¥à¤› खास गà¥à¤£à¥‹à¤‚ के बारे में बता रहे हैं।
1. हृदय के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठघी खाने के फायदे
माना जाता है कि रकà¥à¤¤ में मौजूद हानिकारक कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² की अधिक मातà¥à¤°à¤¾ के कारण हृदय संबंधी कई समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का सामना करना पड़ सकता है (1)। à¤à¤¨à¤¸à¥€à¤¬à¥€à¤†à¤ˆ (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेकà¥à¤¨à¥‹à¤²à¥‰à¤œà¥€ इंफॉरà¥à¤®à¥‡à¤¶à¤¨) की ओर से पà¥à¤°à¤•ाशित वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• रिसरà¥à¤š के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, घी कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने में मदद कर सकता है। विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार की आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• जड़ी-बूटियों में घी को मिलाने से à¤à¤‚टीऑकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पाया जाता है, जो हानिकारक कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² को कम कर सकता है (2)।
2. कैंसर की रोकथाम के लिठघी के फायदे
कैंसर से बचने के लिठघी का सेवन किया जा सकता है। à¤à¤¨à¤¸à¥€à¤¬à¥€à¤†à¤ˆ (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेकà¥à¤¨à¥‹à¤²à¥‰à¤œà¥€ इंफॉरà¥à¤®à¥‡à¤¶à¤¨) की वेबसाइट पर पà¥à¤°à¤•ाशित रिसरà¥à¤š के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, घी में कारà¥à¤¸à¤¿à¤¨à¥‹à¤œà¤¨ यानी कैंसर के असर को कम करने के गà¥à¤£ पाठजाते है। साथ ही घी कैंसर को बढ़ाने वाले टà¥à¤¯à¥‚मर की पनपने से रोक सकता है। इसके अलावा घी में मिलने वाला लिनोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ कोलन कैंसर को à¤à¥€ रोकने का काम कर सकता है (3)।
साथ ही धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि कैंसर घातक बीमारी है। अगर कोई इसकी चपेट में है, तो उचित मेडिकल टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट जरूरी है। सिरà¥à¤« घरेलू उपचार के सहारे रहना सही निरà¥à¤£à¤¯ नहीं है। साथ ही कैंसर की अवसà¥à¤¥à¤¾ में घी का सेवन करना है या नहीं और कितना करना है, इस बारे में डॉकà¥à¤Ÿà¤° ही बेहतर बता सकते हैं।
3. वजन कम करने के लिठघी खाने के फायदे
अगर बात हो वजन कम करने की, तो घी के सेवन से इसे नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ कर लोगों को फिट बनाया जा सकता है। à¤à¤• रिसरà¥à¤š के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, ऑकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¤¾à¤‡à¤œ घी में सैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ और ओलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ पाठजाते हैं। ये दोनों घटक वजन को बढ़ने से रोकते हैं और बढ़े हà¥à¤ वजन को कम करने में मदद कर सकते हैं (4)।
सैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡, जो कि शॉरà¥à¤Ÿ चेन फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होते हैं, फैट बरà¥à¤¨à¤¿à¤‚ग में मदद कर सकते हैं। विशेष रूप से, शरीर के अधिक फैट वाले हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में जमा वसा को कम करने में सहायक हो सकता है। इसके अलावा, à¤à¤• अनà¥à¤¯ शोध में पाया गया है कि पाचन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को धीमा करने के लिठघी पेट में à¤à¤¸à¤¿à¤¡ के सà¥à¤°à¤¾à¤µ को बढ़ाता है और पाचन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ धीमी होने से à¤à¥€ मोटापा कम करने में फायदा मिल सकता है (5)।
इसके अलावा, डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ को कहना है कि जब घी को à¤à¥‹à¤œà¤¨ में शामिल किया जाता है, तो यह खाने के गà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¸à¥‡à¤®à¤¿à¤• इंडेकà¥à¤¸ को कम कर सकता है। इससे बेहतर मेटाबॉलिजà¥à¤® होता ही है, साथ ही बà¥à¤²à¤¡ में शà¥à¤—र की मातà¥à¤°à¤¾ धीरे-धीरे बढ़ती है, जो कि मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ के मरीजों के लिठà¤à¥€ उपयोगी हो सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में दोपहर के खाने में घी को शामिल करना उपयोगी हो सकता है।
4. अचà¥à¤›à¥‡ पाचन के लिà¤
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, घी पचाने में आसान होता है। यह खाना बनाने में इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² होने वाले अनà¥à¤¯ तेलों के मà¥à¤•ाबले पेट के लिठहलà¥à¤•ा होता है। खासकर, गाय का घी पाचन तंतà¥à¤° को बेहतर करता है (6)। संà¤à¤µà¤¤, इसलिठगरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं को शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ महीनों में होने वाली कबà¥à¤œ, मतली और उलà¥à¤Ÿà¥€ की समसà¥à¤¯à¤¾ को कम करने के लिठà¤à¥‹à¤œà¤¨ में घी शामिल करने की सलाह दी जाती है (7)।
5. पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ बढ़ाने के लिठघी खाने के फायदे
सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहने के लिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को बेहतर होना जरूरी है। वहीं, अकà¥à¤¸à¤° बीमार रहने और जलà¥à¤¦à¥€ बीमारी से न उबर पाने वालों के लिठà¤à¥€ घी फायदेमंद माना जा सकता है। यह कमजोर होती रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को बढ़ाने में मदद कर सकता है। दरअसल, घी में कंजगेटेड लिनोलेनिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ पाया जाता है। यह à¤à¤¸à¤¿à¤¡ रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को ठीक करने के साथ ही शारीरिक कमजोरी को दूर करने में मदद कर सकता है (8)। इसके अलावा, घी à¤à¤• लà¥à¤¬à¥à¤°à¥€à¤•ेंट की तरह काम कर सकता है और सà¥à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨ को सà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾ और ताकत दे सकता है।
6. मजबूत हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लिà¤
हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का जलà¥à¤¦à¥€ टूट जाना और उनके जà¥à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ में दिकà¥à¤•त होना, कमजोर हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की निशानी होती है। à¤à¤¸à¤¾ शरीर में विटामिन-के की कमी के कारण होता है। à¤à¥ˆà¤‚स के दूध से बने घी में विटामिन-के की परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ पाई जाती है, जो हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को मजबूती पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने के साथ ही उनके विकास में सहायक हो सकता है (8)।
7. कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² के नियंतà¥à¤°à¤£ के लिà¤
रकà¥à¤¤ में मौजूद कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² के बढ़ने से हृदय की समसà¥à¤¯à¤¾, रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के साथ और à¤à¥€ कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने के लिठसीमित मातà¥à¤°à¤¾ में घी के सेवन को फायदेमंद माना जा सकता है। घी में कंजगेटेड लिनोलेनिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होता है, जिसमें à¤à¤‚टीऑकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट और à¤à¤‚टीà¤à¤¥à¥‡à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¨à¤¿à¤• यानी धमनियों में पà¥à¤²à¤¾à¤• को जमने से रोकना गà¥à¤£ होता है। इसलिà¤, यह रकà¥à¤¤ में मौजूद हानिकारक कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² यानी à¤à¤²à¤¡à¥€à¤à¤² को कम कर सकता है। साथ ही लाà¤à¤¦à¤¾à¤¯à¤• कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² यानी à¤à¤šà¤¡à¥€à¤à¤² के सà¥à¤¤à¤° को बेहतर कर सकता है (9)।
8. घाव, निशान, सूजन की रोकथाम के लिà¤
घी में बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को कम करने वाले हीलिंग गà¥à¤£ पाठजाते हैं। घी के अंदर पाठजाने वाले इन गà¥à¤£à¥‹à¤‚ के कारण, जब इसका उपयोग शहद के साथ किया जाता है, तो यह बहà¥à¤¤ लाà¤à¤•ारी हो सकता है। सà¥à¤¶à¥à¤°à¥à¤¤ संहिता में à¤à¥€ उलà¥à¤²à¥‡à¤– किया गया है कि घी व शहद का उपयोग घाव à¤à¤°à¤¨à¥‡, सूजन को कम करने या फिर शरीर पर घाव और अनà¥à¤¯ कारणों से बने निशान को दूर करने के लिठकिया जा सकता है (10)। शहद के साथ घी का उपयोग लेप के रूप में पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° पर लगाने के लिठकर सकते हैं। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि इस मिशà¥à¤°à¤£ का सेवन हानिकारक हाे सकता है।
9. मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ में सà¥à¤§à¤¾à¤° के लिठघी खाने के फायदे
à¤à¤¨à¤¸à¥€à¤¬à¥€à¤†à¤ˆ की वेबसाइट पर पà¥à¤°à¤•ाशित रिसरà¥à¤š पेपर के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में घी को सà¥à¤®à¤°à¤£ शकà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने वाले रसायन के रूप में पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया गया है। याददाशà¥à¤¤ में सà¥à¤§à¤¾à¤° के लिठघी का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² à¤à¤• बà¥à¤°à¥‡à¤¨ टॉनिक के रूप में किया जा सकता है। हालांकि, मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ में सà¥à¤§à¤¾à¤° के लिठघी पर कई वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• शाेध à¤à¥€ हो चà¥à¤•े हैं, लेकिन अà¤à¥€ à¤à¥€ सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ रूप से कहना मà¥à¤¶à¥à¤•िल है कि मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• के लिठघी पूरी तरह से कारगर है या नहीं (5)।
10. गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में घी के फायदे
घी में मैजूद औषधीय गà¥à¤£ गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ और उसके शिशॠके लिठà¤à¥€ फायदेमंद हाे सकते हैं। घी को सिंघाड़ा पाउडर 1 टेबल सà¥à¤ªà¥‚न और गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ दूध के साथ सेवन करने से पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा (गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤²) की अवसà¥à¤¥à¤¾ ठीक रहती है। चावल और दही के साथ घी का सेवन à¤à¥à¤°à¥‚ण के दिल के फायदेमंद हो सकता है। छठे महीने में चावल के साथ गाय का घी à¤à¥à¤°à¥‚ण के मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• के विकास के लिठउपयोगी हाे सकता है। गाय के घी में à¤à¥à¤¨à¥‡ हà¥à¤ गारà¥à¤¡à¤¨ कà¥à¤°à¥‡à¤¸ सीड के बीजों को दूध और चीनी के साथ मिलाकर सेवन करने से यह गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान महिला को कमजोरी और à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ से बचाने में मदद कर सकता है (11)।
वहीं, डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ की मानें तो घी फैट सॉलà¥à¤¯à¥à¤¬à¤² विटामिनà¥à¤¸ का अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है। घी में मौजूद विटामिन डी, जो कि à¤à¤• फैट सॉलà¥à¤¯à¥à¤¬à¤² विटामिन है, थायराइड गà¥à¤°à¤‚थि को रेगà¥à¤²à¥‡à¤Ÿ कर सकता है और यह पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है।
11. आंखों के लिà¤
घी में कई पोषक ततà¥à¤µ पाठजाते हैं। इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ में से à¤à¤• है विटामिन-à¤à¥¤ माना जाता है कि विटामिन-ठकी कमी से आंखों की रोशनी पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकती है। वहीं, घी के सेवन से विटामिन-ठकी अचà¥à¤›à¥€ मातà¥à¤°à¤¾ मिलती है, जो इस दोष को दूर करने के लिठकारगर हो सकता है (8)।
12. विटामिन à¤
शरीर को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रखने के लिठविटामिन ठकी पà¥à¤°à¤®à¥à¤– à¤à¥‚मिका होती है। विटामिन ठसà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ दांतों, कंकाल और सॉफà¥à¤Ÿ टिशॠके साथ ही तà¥à¤µà¤šà¤¾ की उमà¥à¤° को बढ़ने से बचाने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही यह आंखों के लिठà¤à¥€ फायदेमंद होता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह आंख के रेटिना में रंगदà¥à¤°à¤µà¥à¤¯ पैदा करता है (12)। वहीं, घी को विटामिन à¤à¤• का अचà¥à¤›à¤¾ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ माना जाता है (13)। à¤à¤¸à¥‡ में अचà¥à¤›à¥‡ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठघी को आहार में शामिल करने के कई फायदे हासिल किठजा सकते हैं।
13. तà¥à¤µà¤šà¤¾ की देखà¤à¤¾à¤² के लिà¤
घी को फटे होंठठीक करने से लेकर चेहरे पर निखार लाने के लिठइसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जा सकता है। साथ ही ऊपर घाव à¤à¤°à¤¨à¥‡ वाले पॉइंट में à¤à¥€ बताया गया है कि किस पà¥à¤°à¤•ार घी तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर आई सूजन और घाव को à¤à¤°à¤¨à¥‡ में मदद कर सकता है। घी में कई पà¥à¤°à¤•ार के आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• गà¥à¤£ पाठजाते है, जो तà¥à¤µà¤šà¤¾ की सà¥à¤•ेलिंग यानी तà¥à¤µà¤šà¤¾ का सूखापन, इरिथेमा, जिसमें तà¥à¤µà¤šà¤¾ में सूजन व संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण लालपन हो जाता है, व पà¥à¤°à¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¸ यानी तà¥à¤µà¤šà¤¾ की खà¥à¤œà¤²à¥€ की शिकायत को दूर करने में मदद कर सकते हैं (2)।
घी का उपयोग
रोजाना देसी घी का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है, लेकिन धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि देसी घी के फायदे तà¤à¥€ मिलते हैं, जब इसका उपयोग सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में किया जाà¤à¥¤ नीचे हम आपको सà¥à¤µà¤¾à¤¦ और सेहत के लिठघी के कà¥à¤› खास उपयोग बता रहे हैं।
रोटी को सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ बनाने के लिठउस पर घी का उपयोग करना आम बात है।
इसका उपयोग कई पकवान और मिषà¥à¤ ान बनाने के लिठकर सकते हैं।
घी का उपयोग तड़का लगाने के लिठà¤à¥€ किया जा सकता है।
पानी, काली मिरà¥à¤š, चीनी और अदरक की चाय में घी मिलाकर पीने से खांसी और गले की समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं में फायदा मिल सकता है।
दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤ में घी का उपयोग डोसा, इडली व उतà¥à¤¤à¤ªà¤® जैसे सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ खादà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को बनाने के लिठकिया जाता है।
गरà¥à¤®à¥€ बढ़ने पर à¤à¤• चमà¥à¤®à¥‡à¤š घी में थोड़ी-सी शकà¥à¤•र को मिलाकर इसका सेवन करने से गरà¥à¤®à¥€ के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ को कम करने में मदद मिल सकती है।
देसी घी को कई जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने पर यह कई रोगों को दूर करने का काम बखूबी करता है।
किसी à¤à¥€ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ को बनाने में तेल के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर घी का उपयोग कर सकते हैं।
अंत तक पढ़ें
घी के उपयोग के बाद यहां हम आपकाे बता रहे हैं घर में घी बनाने का आसान तरीका।
घर पर घी बनाने का तरीका
वैसे तो घी बाजार में à¤à¥€ उपलबà¥à¤§ होता है, लेकिन घर में बने घी के सà¥à¤µà¤¾à¤¦ की बात ही कà¥à¤› और है। यहां हम घर पर घी बनाने की विधि के बारे में बता रहे हैं।
सबसे पहले 10 दिन तक कम से कम 500 गà¥à¤°à¤¾à¤® दूध में लगने वाली मलाई को इकटà¥à¤ ा करें।
अब इस मलाई को बà¥à¤²à¥‡à¤‚डर में डालकर 5 मिनट तक बà¥à¤²à¥‡à¤‚ड करें।
बà¥à¤²à¥‡à¤‚ड करने के बाद आप देखेंगे कि मकà¥à¤–न और तरल (मटà¥à¤ ा व छाछ) दोनों अलग-अलग हो गठहैं।
अब à¤à¤• बरà¥à¤¤à¤¨ में छाछ और दूसरे में मकà¥à¤–न को निकाल लें।
मकà¥à¤–न को à¤à¤• नॉन सà¥à¤Ÿà¤¿à¤• पैन में डालकर पकाà¤à¤‚।
मकà¥à¤–न धीरे-धीरे पिघलने लगेगा। जैसे ही मकà¥à¤–न पिघलना शà¥à¤°à¥‚ हो जाà¤, तो आंच को कम कर दें।
थोड़ी ही देर में इसमें से ऊपर की तरफ घी तैरने लगेगा और नीचे कà¥à¤› जला हà¥à¤† अवशेष नजर आने लगेगा।
इसे आप ठंडा होने पर छान लें। छना हà¥à¤† तरल दà¥à¤°à¤µà¥à¤¯ घी के रूप में आपको मिल जाà¤à¤—ा।
लीजिà¤, घर में बना हà¥à¤† घी तैयार है।
नीचे सà¥à¤•à¥à¤°à¥‰à¤² करें
घी बनाने की विधि को जानने के बाद आपको बताते हैं कि कैसे इसे लंबे समय तक सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखा जाà¤à¥¤
घी को लमà¥à¤¬à¥‡ समय तक सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ कैसे रखें?
घी को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखने के लिठकà¥à¤› विशेष करने जरूरत नहीं है। इसे à¤à¤• जार में à¤à¤°à¤•र किसी ठंडे सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर रख दें। दरअसल, ठंडे सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर रखा हà¥à¤† घी तीन महीने तक खराब नहीं होता है। हालांकि, घी की तासीर गरà¥à¤® होती है फिर à¤à¥€ इसे रेफà¥à¤°à¤¿à¤œà¤°à¥‡à¤Ÿà¤° में à¤à¥€ रखा जा सकता है। फà¥à¤°à¤¿à¤œ में रखा हà¥à¤† घी à¤à¤• साल तक सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रहता है। इसे कमरे के तापमान पर à¤à¥€ रखा जा सकता है।
और à¤à¥€ है जानकारी
घी के सेवन के साथ ये à¤à¥€ जानना जरूरी है कि घी के नà¥à¤•सान à¤à¥€ हो सकते हैं। आइà¤, जानते हैं।
घी के नà¥à¤•सान
जैसे हर सिकà¥à¤•े के दो पहलू होते हैं, वैसे ही हर चीज के फायदे और नà¥à¤•सान दोनों ही होते हैं। à¤à¤¸à¤¾ नहीं है कि घी हमेशा फायदेमंद ही होता हो। कà¥à¤› परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में घी खाने के नà¥à¤•सान à¤à¥€ हाे सकते हैं। जैसे:
घी में विटामिन ठकी अचà¥à¤›à¥€ मातà¥à¤°à¤¾ पाई जाती है (14)। विटामिन ठका अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में सेवन करने से सिरदरà¥à¤¦, à¤à¥‚ख में कमी और उलà¥à¤Ÿà¥€ के साथ-साथ शà¥à¤µà¤¾à¤¸ नली के जाम होने का खतरा हो सकता है (15)।
घी के जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सेवन से शरीर में उचà¥à¤š सà¥à¤¤à¤° के सैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ और कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤² की मातà¥à¤°à¤¾ बढ़ सकती है, इनकी बड़ी हà¥à¤ˆ मातà¥à¤°à¤¾ को हृदय रोगों के लिठहानिकारक माना गया है (16)।
अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में किया गया घी का सेवन अपच और दसà¥à¤¤ की समसà¥à¤¯à¤¾ का कारण बन सकता है (17)।
घी की तासीर गरà¥à¤® होती है इसलिठअधिक सेवन शरीर में गरà¥à¤®à¥€ बढ़ा सकता है।
इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल के माधà¥à¤¯à¤® से आपने जाना कि सदियों से रसोई में उपयोग किठजाने वाले घी का आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में à¤à¥€ बराबर का सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ है। घी न सिरà¥à¤« à¤à¥‹à¤œà¤¨ का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ बढ़ाता है, बलà¥à¤•ि अपने गà¥à¤£à¥‹à¤‚ के कारण सेहत के लिठà¤à¥€ फायदेमंद होता है। अगर आप घी खाने से कतराते हैं, तो इससे होने वाले कई फायदों के लाठनहीं ले पाà¤à¤‚गे। à¤à¤¸à¥‡ में संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में घी को खाने में शामिल कर न सिरà¥à¤« खाने का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ बà¥à¤¾à¤à¤‚, बलà¥à¤•ि सेहत के लाठà¤à¥€ पाà¤à¤‚। वहीं, अगर किसी को सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾ है, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह से इसे अपने à¤à¤¾à¥‡à¤œà¤¨ में शामिल करें।
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